સ્પર્ધાત્મક પરિક્ષાઓ માટેની દિશાસૂચક બ્લોગ દુનિયા

ઉઠો,જાગો અને ધ્યેયપ્રાપ્તિ સુધી મંડ્યા રહો-સ્વામિ વિવેકાનંદ

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Sunday, June 07, 2015


20वां राष्ट्रमंडल खेल 2014: भारत की पदक सूची

ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में 3 अगस्त 2014 को संपन्न 20वें राष्ट्रमंडल खेल 2014 में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 64 पदक जीता एवं पांचवे स्थान पर रहे. इसमें 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य पदक शामिल हैं. प्रथम चार स्थान पर क्रमशः इंग्लैंड (174 पदक), ऑस्ट्रेलिया (137 पदक), कनाडा (82 पदक) एवं स्कॉटलैंड (53 पदक) रहे.
भारत की पदक सूची 

(स्वर्ण पदक)

1.    संजीता चानू (भारोत्तोलन )
2.    सुखेन डे (भारोत्तोलन )
3.    सतीश शिवलिंगम (भारोत्तोलन)
4.    अभिनव बिंद्रा (निशानेबाजी)
5.    अपूर्वी चंदेला (निशानेबाजी)
6.    राही सरनोबत (निशानेबाजी)
7.    जीतू राय (निशानेबाजी)
8.    अमित कुमार (कुश्ती)
9.    विनेश फोगट (कुश्ती)
10.    सुशील कुमार (कुश्ती)
11.    बबीता कुमारी (कुश्ती)
12.    योगेश्वर दत्त (कुश्ती)
13.    विकास गौड़ा (चक्का फेंक)
14.    दीपिका पल्लीकल व जोशना चिनप्पा (स्क्वॉश)
15.    पी कश्यप (बैडमिंटन)

(रजत पदक)
1.    मीराबाई चानू (भारोत्तोलन)
2.    संतोषी मात्सा (भारोत्तोलन)
3.    सुशीला लिक्माबाम (जूडो)
4.    नवजोत चाना (जूडो)
5.    मलायका गोयल (निशानेबाजी)
6.    प्रकाश नांजप्पा (निशानेबाजी)
7.    अयोनिका पॉल (निशानेबाजी)
8.    अनीसा सैयद (निशानेबाजी)
9.    श्रेयसी सिंह (निशानेबाजी)
10.    रवि कातुलू (भारोत्तोलन)
11.    गुरपाल सिंह (निशानेबाजी)
12.    गगन नारंग (निशानेबाजी)
13.    विकास ठाकुर (भारोत्तोलन)
14.    हरप्रीत सिंह (निशानेबाजी)
15.    संजीव राजपूत (निशानेबाजी)
16.    राजीव तोमर (कुश्ती)
17.    ललिता कुमारी (कुश्ती )
18.    बजरंग (कुश्ती)
19.    साक्षी मलिक (कुश्ती)
20.    सत्यव्रत कादियान (कुश्ती )
21.    गीतिका जाखड़ (कुश्ती )
22.    सीमा पूनिया (डिस्कस थ्रो)
23.    अचंत शरत कमल और एंथोनी अमलराज (टेबल टेनिस)
24.    लैशराम देवेंद्रो मुक्केबाजी)
25.    देवेंद्रो सरिता (मुक्केबाजी)
26.    मनदीप जांगड़ा (मुक्केबाजी)
27.    विजेंद्र सिंह (मुक्केबाजी)
28.    राजिंदर रहेलू (पावरलिफ्टिंग)
29.    ज्वाला व अश्विनी पोनप्पा (बैडमिंटन)
30.    पुरुष हॉकी टीम

(कांस्य पदक)
1.    गणेश माली (भारोत्तोलन)
2.    कल्पना (जूडो)
3.    स्वाति सिंह (भारोत्तोलन)
4.    राजविंदर कौर (जूडो)
5.    ओंकार ओटारी (भारोत्तोलन)
6.    मुहम्मद असब (निशानेबाजी)
7.    पूनम यादव (भारोत्तोलन)
8.    मानवजीत सिंह संधू (निशानेबाजी)
9.    गगन नारंग (निशानेबाजी)
10.    लज्जा गोस्वामी (निशानेबाजी)
11.    चंद्रकांत माली (भारोत्तोलन)
12.    नवजोत कौर (कुश्ती)
13.    दीपा करमाकर ( जिम्नास्टिक)
14.    पवन कुमार (कुश्ती)
15.    पिंकी जांगड़ा (मुक्केबाजी)
16.    सकीना खातून (पावरलिफ्टिंग)
17.    पीवी सिंधू (बैंडमिंटन)
18.    आरवी गुरुसाइदत्त (बैंडमिंटन)
19.    अरपिंदर सिंह (ट्रिपल जंप)

विदित हो कि वर्ष 2010 में दिल्ली में संपन्न 19वें राष्ट्रमंडल खेल में भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदक जीते थे एवं पदकों की सूची में दूसरे स्थान पर रहा था.


ગુજરાતનો ઇતિહાસ

મહાગુજરાતના આંદોલનની કેટલીક વિશિષ્ટતાઓ અને ઐતિહાસિક વક્રતાઓ .
1) ‘ગુજરાતની અસ્મિતા’ શબ્દપ્રયોગ સાથે જેમનું અભિન્નપણે સંકળાઇ ચૂક્યું છેતે કનૈયાલાલ મુનશી મહાગુજરાતના આંદોલન વખતે સામેની છાવણીમાં રહ્યા. ૧૯૪૮માં તેમની આગેવાની હેઠળ ભરાયેલા મહાગુજરાત સંમેલનમાં ગુજરાતી બોલતી સમસ્ત પ્રજાનું એકીકરણ કરવાનો નિર્ધાર વ્યક્ત થયો હતો,પણ ૧૯૫૬માં ઉત્તર પ્રદેશના કોંગ્રેસી રાજ્યપાલ મુનશીએ મુંબઇ પણ ગુજરાતમાં હોવું જોઇએ એવી અવ્યવહારૂ લાગણીથી દોરાઇનેછેક ૧૯૫૨માં મુંબઇ વગરનું ગુજરાત માગતી ‘મહાગુજરાત જનતાપરિષદનો વિરોધ કર્યો.
2) અમદાવાદમાં લૉ ગાર્ડન વિસ્તારમાં આવેલું ‘ભાઇકાકા ભવન’ જેમના નામે છે તે ભાઇલાલભાઇ પટેલ (ભાઇકાકા) વલ્લભ વિદ્યાનગરના સ્થાપક તરીકે જાણીતા છેપણ મહાગુજરાત આંદોલનમાં તેમની ભૂમિકા વિશે ભાગ્યે જ ઉલ્લેખ થાય છે. મહાગુજરાતના નાયક ઈંદુલાલ યાજ્ઞિકે આત્મકથામાં લખ્યું છે કેમહાગુજરાતના નવા આંદોલનની પહેલી ઘડીથી તે છેવટે સન ૧૯૬૦માં ગુજરાતના જુદા રાજ્યનીસ્થાપના થઇ ત્યાં સુધી તે (ભાઇકાકા) મારા સર્વોત્કૃષ્ટ સલાહકાર રહ્યા.’ મહાગુજરાત અને મહારાષ્ટ્રના નેતાઓ વચ્ચે સુમેળ સાધવામાં અને વહીવટી કુનેહથી મતભેદો ઉકેલવામાં ભાઇકાકાએ મહત્ત્વની ભૂમિકા ભજવી.
3) મહાગુજરાતની માગણીને છેક ૧૯૫૨માં ગુજરાતી સાહિત્ય પરિષદે ઠરાવ દ્વારા ટેકો આપ્યો હતો. મોરારજી દેસાઇએ ડાંગની ભાષા મરાઠી હોવાનું જાહેર કર્યું ત્યારે પણ ગુજરાત સાહિત્ય સભાએ વિરોધ પ્રદર્શીત કર્યો હતો. પ્રખર ગાયક પંડિત ઓમકારનાથે પણ પોતાના બુલંદ અવાજે આ નિર્ણયનો વિરોધ કર્યો.
4) અસલી લડાઇ કેન્દ્ર સરકાર વિરૂદ્ધ ગુજરાત અને કેન્દ્ર સરકાર વિરૂદ્ધ મહારાષ્ટ્રની હતી. પણ કોંગ્રેસી કેન્દ્ર સરકારે ગુજરાતમુંબઇ અને મહારાષ્ટ્ર એવા ત્રણ ભાગ પાડતાં મરાઠીભાષીઓને એવું લાગ્યું કે ગુજરાતીઓને કારણે મુંબઇને મહારાષ્ટ્રથી અલગ પાડવામાં આવ્યું છે. એટલે મરાઠીઓએ મુંબઇના ગુજરાતીઓ પર હુમલા કર્યા અને તોફાનો દરમિયાન પોલીસ ગોળીબારમાં મૃત્યુ પામેલા લોકોમહારાષ્ટ્રના શહીદ’ તરીકે ઓળખાયા.
13) ગુજરાતની સ્થાપના પૂર્વે મહાગુજરાત ચળવળમાં મુંબઈના મરાઠી ભાષી સૂત્ર આમચી બમ્બઈ સામે ગુજરાતી ભાષામાં ગુજરાત મોરી રેસૂત્રોરચારથી વારંવાર હિંસક અથડામણો થયેલ હતી. ચળવળ દરમિયાન અમદાવાદમાં ગોળીબાર થયા પછી અલગ રાજયની રચના માટેના આંદોલનને વેગ મળ્યો હતો.

લોકસભાએ ગુજારતના પ્રસ્તાવની મંજૂરી આપી દીધી ત્યારે વિસનગરમાં મહાગુજરાત પરિષદની આખરી બેઠક થઈ અને તેને ભંગ કરી દેવાઈ. 1960માં મુંબઈના દ્વિભાષી રાજ્યમાંથી ગુજરાતને અલગ કરી એક નવા રાજ્યના સ્થાપના રવિશંકર મહારાજના હસ્તે થઈ હતી. સ્થાપના બાદ ગુજરાતે મોટાભાગના ક્ષેત્રે પ્રગતિ અને વિકાસ કર્યો. આજે દેશભરમાં ગુજરાતનું નામ અને યોગદાન છે. છેલ્લે બળવંતરાય મહેતા સમિતિની ભલામણો પ્રમાણે ગુજરાત રાજયે સત્તાના વિકેન્દ્રિકરણનો સિદ્વાંત સ્વીકાર્યો, જેથી જિલ્લા, તાલુકા અને ગ્રામપંચાયત કક્ષાએ સત્તાનું વિકેન્દ્રિકરણ થયું અને વિકાસમાં જિલ્લા પંચાયતોનો ફાળો મળવાનો શરૂ થયો. ગુજરાતીઓનું ખમીર અને કઠોર પરિશ્રમ અને યોગદાન દુનિયાભરમાં વખણાય છે.

Wednesday, August 06, 2014

2020 में मंगल ग्रह रोवर मिशन


नासा ने मंगल ग्रह के वातावरण की जांच के लिए 2020 में मंगल ग्रह 2020 रोवर मिशन लांच करने की घोषणा की

नासा ने 31 जुलाई 2014 को अमेरिका के वाशिंगटन स्थित मुख्यालय में घोषणा की कि वह 2020 में मार्स 2020 रोवर मिशन के तहत नया रोवर मंगल ग्रह पर भेजेगा. मार्स 2020 मिशन मंगल ग्रह के वातावरण में संभावित आवास निर्धारित करने का प्रयास करेगा और इस ग्रह पर जीवन के प्राचीन संकेत खोजने की कोशिश करेगा. अगर यह प्रयास सफल रहा तो इससे भविष्य मे मानवयुक्त मिशन के लिए मार्ग प्रशस्त हो सकेगा.
मार्स 2020 रोवर मिशन जुलाई या अगस्त 2020 में लांच किया जाएगा और यह आठ से नौ महीनों में मंगल ग्रह की जमीन पर साल 2021 में उतरेगा.  नासा का जेट प्रोपल्सन लेबोरेट्री मार्स 2020 रोवर मिशन को तैयार और इसके परिचालन का प्रबंध करेगा.मार्स 2020 रोवर मिशन को विकसित करने के लिए नासा की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कार्यक्रम ने मानव अन्वेषण और मार्स 2020 रोवर मिशन की टीम के साथ भागीदारी की है. इसे राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद के वर्ष 2011 के ग्रह विज्ञान दशक सर्वेक्षण की विज्ञान के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दी गई सिफारिशों के लिए विकसित किया जा रहा है.
मार्स 2020 रोवर मिशन सफल रोवर क्युरोसिटी के डिजाइन पर आधारित है जो अगस्त 2012 से लाल ग्रह पर उतरने के बाद से काम कर रहा है और यह नासा के मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम का एक हिस्सा है.
 
मार्स 2020 रोवर मिशन का महत्व

  • इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक चट्टानों और मिट्टी के नमूनो की पहचान और संग्रह करने के लिए करेंगे जिसे भविष्य के मिशन के लिए पृथ्वी पर संभावित वापसी के लिए जमा कर रखा जाएगा.
  • भविष्य के मानव खोजकर्ता कैसे लाल ग्रह की सतह पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं, इस बारे में हमारे ज्ञान को बढ़ाने में भी मदद करेगा.
  • भविष्य के मानव अभियान के डिजाइनर इस मिशन का उपयोग मंगल ग्रह के धूल से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को समझने और वहां के वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाने की प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन के लिए भी कर सकते हैं. इन प्रयोगों से इंजीनियरों को मंगल ग्रह के संसाधनों का मानव श्वसन के लिए ऑक्सीजन बनाने में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है और रॉकेट इंधन के लिए संभावित ऑक्सीकारक के रूप में इस्तेमाल करने के बारे में सीखने में मदद मिल सकती है.मार्स 2020 रोवर मिशन में जाने वाले सात अंतरिक्ष उपकरण
    ये सात अंतरिक्ष उपकरणों का चयन जनवरी 2014 में दुनिया भर के शोधकर्ताओं और इंजीनियरों से प्राप्त 58 प्रस्तावों में से चुने गए हैं. ये सात चुने गए प्रस्तावों को उपकरण का रूप देने के लिए नासा को करीब 130 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करने होंगे.
        मार्स ऑक्सीजन आईएसआरयू एक्सपेरीमेंट (MOXIE)– यह एक अन्वेषण प्रौद्योगिकी जांच है और यह मंगल ग्रह पर मौजूद वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन पैदा कर सकता है. इसके द्वारा उत्पादित ऑक्सीजन मानव श्वसन के लिए लाभकारी होगा और संभवतः इसका इस्तेमाल वापसी मिशनों में रॉकेट इंधन के तौर पर किया जा सकेगा. 
    •    MastcamZ– यह पैनारोमिक और स्टीरीयोस्कोपिक इमेजिंग क्षमता और जूम करने की क्षमता वाला एक उन्नत कैमरा है. यह मंगल ग्रह के सतह के खनिज को पहचानने में भी सक्षम है. 
    •    SuperCam– यह एक उपकरण है जो छवि लेने, रासायनिक संरचना विश्लेषण और खनिज के काम आएगा. इसके अलावा यह दूर से ही चट्टानों और रिगोलिथ में मौजूद कार्बनिक यौगिकों की उपस्थिति की पहचान कर लेगा. 
    •    एक्स–रे लिथोकेमेस्ट्री के लिए ग्रह उपकरण (PIXL)– यह एक एक्स– रे प्रतिदीप्त स्पेक्ट्रोमीटर है और इसमें एक उच्च रिजोल्यूशन वाला इमेजर भी है जो मंगल ग्रह के सतह में मौजूद सामग्री की मौलिक संरचना का निर्धारण कर सकता है. यह उपकरण रासायनिक तत्वों के अधिक विस्तृत पहचान और विश्लेषण की क्षमता प्रदान करता है. 
    •    स्कैनिंग हैबिटेबल इंवायरमेंट्स विद रमन एंड ल्यूमिनसाइंस फॉर ऑर्गेनिक्स एंड केमिकल्स (SHERLOC)– यह एक स्पेक्ट्रोमीटर है जो सटीक छवि प्रदान करेगा और खनिजों के निर्धारण एवं कार्बनिक यौगिकों का पता लगाने के लिए पराबैंगनी (यूवी) लेजर का उपयोग करेगा. SHERLOC पहला यूवी रमण स्पेक्ट्रोमीटर होगा जो मंगल ग्रह के लिए उड़ान भरेगा और अन्य अंतरिक्ष उपकरणों के साथ पूरक माप प्रदान करेगा. 
    •    मंगल ग्रह पर्यावरण गतिशीलता विश्लेषक (MEDA): यह सेंसरों का एक सेट है और यह तापमान, हवा की गति और दिशा, दवाब, सापेक्ष आर्द्रता और धूल का आकार एवं आकार का माप उपलब्ध कराने में सक्षम है.
    •    मंगल ग्रह के उपसतह के एक्सप्लोरेशन के लिए रडार इमेजर (RIMFAX)– यह जमीन के भीतर जाने वाला रडार है और यह सतह के भूगर्भिक संरचना की सेंटीमीटर–पैमाने का रेजोल्यूशन मुहैया कराएगा. 

    मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम के बारे में
    मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम मंगल ग्रह को एक गतिशील प्रणाली के तौर पर चित्रित और समझना चाहता है. इसमें वर्तमान और अतीत का वायुमंडल, जलवायु चक्र, भूविज्ञान और जैविक क्षमता भी शामिल है. इसमें ऑपर्चुनिटी एवं क्युरोसिटी रोवर्स शामिल है, ओडिसी और मार्स रीकानिसन्स ऑर्बिटर अंतरिक्ष यान फिलहाल इस ग्रह की परिक्रमा कर रहे हैं और MAVEN ऑर्बिटर जिसके सितंबर 2014 में लाल ग्रह पर पहुंच जाना निर्धारित है, यह वायुमंडल के उपरी परत का अध्यय करेगा. 
    वर्ष 2016 में, मार्स लैंडर मिशन जिसे इनसाइट कहा जा रहा है, को मंगल ग्रह के गहराई से जांच को पहली बार देखने के लिए लांच किया जाएगा. 

    इसके अलावा, नासा यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के 2016 और 2018 एक्सोमार्स मिशनों के लिए भी सहयोग कर रहा है. इसमें ईएसए के 2016 ऑर्बिटर के लिए इलेक्ट्राटेलिकम्युनिकेशन रेडियो और 2018 एक्सोमार्स रोवर के लिए महत्वपूर्ण एस्ट्रोबायोलॉजी साधन शामिल है.